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समय-सीमा बैठक में प्रशासनिक कसावट, कलेक्टर ने तय की अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही*
*जनदर्शन से पीएम पोर्टल तक लंबित मामलों पर कलेक्टर नाराज़, त्वरित निराकरण के सख्त निर्देश

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एमसीबी/ जिले में प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में संदेश दिया कि शासन की प्राथमिकताओं से जुड़े कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही, शिथिलता या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में जिले के समस्त विभागों के लंबित प्रकरणों की गहन समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को चेताया कि अब केवल फाइलों की कार्रवाई नहीं, बल्कि आम जनता को वास्तविक और समयबद्ध समाधान दिखाई देना चाहिए। कलेक्टर ने भू-अभिलेख, शिक्षा, स्वास्थ्य, आयुष, उद्यानिकी, लोक निर्माण विभाग, हाउसिंग बोर्ड, सहकारी संस्थाओं और नगर निकायों से संबंधित भूमि चिन्हांकन व आवंटन के मामलों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। डीएवी मनेन्द्रगढ़ एवं चिरमिरी की भूमि स्थिति तत्काल स्पष्ट करने, एसईसीएल से लंबित स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्त करने तथा अमृत मिशन, डीएमएफ कन्या छात्रावास, रिडेवलपमेंट योजना, नागपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, ट्रांजिट हॉस्टल, आयुर्वेद औषधालय, शासकीय नर्सरी और उद्यानिकी कार्यालय के लिए भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया बिना किसी देरी के पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ और नगर निगम चिरमिरी को सख्त निर्देश देते हुए कलेक्टर ने कहा कि सांस्कृतिक भवन, पीएमएवाई मल्टी स्टोरीड भवन, ईडब्ल्यूएस कॉलोनी, अटल आवास योजना, जल आपूर्ति परियोजना और अमृत मिशन के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए। सभी प्रस्ताव पूर्ण दस्तावेजों के साथ तत्काल राज्य कार्यालय को भेजे जाएं और बैंक एटीएम हेतु दुकान आवंटन सहित नगरीय सुविधाओं के विस्तार में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाए।
जनदर्शन, पीजीएन, प्रधानमंत्री पोर्टल, मुख्यमंत्री जनदर्शन और वेब माध्यम से प्राप्त लंबित आवेदनों की समीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में शिकायतें लंबित पाए जाने पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने दो टूक कहा कि जनसमस्याओं का त्वरित समाधान प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की उदासीनता सीधे जिम्मेदारी तय करेगी। कृषि, खाद्य, जल संसाधन, खनिज, पुलिस, विद्युत, नगर निकाय, पंचायत, परिवहन, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित सभी विभागों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक प्रकरण का नियमानुसार परीक्षण कर समय-सीमा में वास्तविक निराकरण सुनिश्चित किया जाए और उसकी तथ्यात्मक जानकारी पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड की जाए। केवल औपचारिक या अधूरी जवाबदेही अब स्वीकार्य नहीं होगी।


कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जनदर्शन, पीएम पोर्टल या अन्य ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त आवेदनों में अनावश्यक देरी या टालमटोल पाई गई तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी। आगामी समय-सीमा बैठक में सभी विभागों को अद्यतन प्रगति रिपोर्ट के साथ उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए।
डीएमएफ और सीएसआर मद से संचालित कार्यों की समीक्षा में कलेक्ट्रेट रिकॉर्ड रूम और शौचालय निर्माण, पीजी कॉलेज में अतिरिक्त कक्ष, आंगनबाड़ी केंद्रों में विद्युतीकरण, कन्या छात्रावास निर्माण, पीएचई वाहन अनुमति और लंबित डीपीआई निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए। फिजियोथेरेपी कॉलेज और स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़े एसईसीएल एनओसी प्रकरणों में अनावश्यक विलंब पर भी कलेक्टर ने नाराजगी जताई। रेलवे भू-अर्जन मामलों, बोरीडांड दोहरीकरण अवार्ड और सीए भूमि प्रकरणों में त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए। आधार सेवाओं की समीक्षा में सभी ब्लॉकों में नियमित अपडेट कार्य और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
राजस्व मामलों में सुन्दरपुर को राजस्व ग्राम घोषित करने, तेंदूडांड और चिमटीमार में नवीन भूमि सर्वे, पीएमजीएसवाई सड़क विवाद, मंदिर ट्रस्ट से जुड़े प्रकरण और शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। स्कूल परिसरों के आसपास तंबाकू निषेध कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष जोर दिया गया।
शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, लोक निर्माण, खेल, समाज कल्याण, खनिज, आबकारी, परिवहन और विद्युत विभागों की समीक्षा में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि चाहे वह नवोदय विद्यालय और डाइट की स्वीकृति हो, भवनविहीन स्कूलों के प्रस्ताव हों, छात्रवृत्ति वितरण हो या बड़े निर्माण कार्य, गुणवत्ता और समय-सीमा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री घोषणाओं से जुड़े विद्युतीकरण और विकास प्रस्तावों को तत्काल राज्य शासन को भेजने के निर्देश भी दिए गए। समय-सीमा बैठक में कलेक्टर का स्पष्ट संदेश रहा कि अब प्रशासनिक कामकाज में ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। हर विभाग को जवाबदेह, पारदर्शी और समयबद्ध होकर काम करना होगा ताकि शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ जिले के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

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