रिटायरमेंट के बाद भी ‘पद का प्रभाव’ बरकरार! तेंदूपत्ता प्रभारी बने पूर्व एसडीओ पर उठे सवाल मनेंद्रगढ़ वन मंडल में नियम-कानूनों की अनदेखी, आखिर किस ‘कमीशन खेल’ से मेहरबान हैं उच्च अधिकारी?
रिटायरमेंट के बाद भी ‘पद का प्रभाव’ बरकरार! तेंदूपत्ता प्रभारी बने पूर्व एसडीओ पर उठे सवाल मनेंद्रगढ़ वन मंडल में नियम-कानूनों की अनदेखी, आखिर किस ‘कमीशन खेल’ से मेहरबान हैं उच्च अधिकारी?

मनेंद्रगढ़ /एमसीबी : वन मंडल मनेंद्रगढ़ एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला एक ऐसे पूर्व अधिकारी से जुड़ा है, जो सेवानिवृत्ति के बाद भी विभाग में प्रभावी भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पूर्व रिटायर्ड एसडीओ के.एस. खुटिया वर्तमान में तेंदूपत्ता प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे हैं और पिछले 2-3 वर्षों से लगातार इस पद पर बने हुए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किस नियम के तहत एक सेवानिवृत्त अधिकारी को इस तरह की जिम्मेदारी सौंपी गई है? विभागीय जानकारों का कहना है कि यह व्यवस्था न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
नियमों के आगे ‘प्रभाव’ हावी?
वन विभाग में तेंदूपत्ता संग्रहण और उसके प्रबंधन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होते हैं, जिनमें नियुक्ति और जिम्मेदारियों को लेकर कड़े प्रावधान हैं। बावजूद इसके, एक रिटायर्ड अधिकारी का लंबे समय तक प्रभारी बने रहना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं नियम-कानूनों को दरकिनार किया जा रहा है।


‘कमीशन खेल’ की चर्चाएं तेज
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि तेंदूपत्ता जैसे लाभकारी कार्य में ‘कमीशन का खेल’ बड़ा कारण हो सकता है। सूत्रों की मानें तो इसी वजह से उच्च अधिकारी भी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए हैं और कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं।
तीखी प्रतिक्रियाएं:
“जब विभाग में कार्यरत योग्य अधिकारी मौजूद हैं, तो रिटायर्ड व्यक्ति को जिम्मेदारी देना सीधे-सीधे नियमों का उल्लंघन है।”
“यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त अनियमितताओं का उदाहरण है।”
“अगर जांच हो जाए, तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।”
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे मामले में अब तक किसी भी उच्च अधिकारी की स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं पूरे मामले में मिलीभगत हो सकती है।
जांच की मांग
जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह व्यवस्था में भ्रष्टाचार को और बढ़ावा देगा।
निष्कर्ष:
वन मंडल मनेंद्रगढ़ में पूर्व एसडीओ की तेंदूपत्ता प्रभारी के रूप में नियुक्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर संज्ञान लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।





