पीएमजीएसवाई सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, बिना अनुमति मिट्टी उत्खनन से राजस्व को लाखों की क्षति ग्रामीणों की जमीन से मिट्टी निकालकर सड़क निर्माण में किया जा रहा उपयोग, सरपंच ने जताई कड़ी आपत्ति।
पीएमजीएसवाई सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, बिना अनुमति मिट्टी उत्खनन से राजस्व को लाखों की क्षति ग्रामीणों की जमीन से मिट्टी निकालकर सड़क निर्माण में किया जा रहा उपयोग, सरपंच ने जताई कड़ी आपत्ति।

लोहारी / एमसीबी :- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अंतर्गत चल रहे सड़क निर्माण जो कि लोहारी मार्ग नावापारा से पल्थाजाम रोड करीब जो कि 7 किलोमीटर बनना है उनमें भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि बिना गिट्टी डाले मिट्टी से ही रोड का निर्माण कार्य ठेकेदार द्वारा पूरा कर दिया जा रहा है। मिट्टी में फीलिंग के नाम पर ठेकेदार द्वारा मनमानी की जा रही है। बिना किसी वैध अनुमति और खनिज विभाग की स्वीकृति के ग्रामीणों की निजी भूमि,राजस्व की भूमि एवं जंगल की भूमि से मिट्टी का उत्खनन कर उसे सड़क निर्माण में उपयोग किया जा रहा है, जिससे शासन को राजस्व की भारी क्षति पहुंच रही है।
जानकारी के अनुसार निर्माण एजेंसी द्वारा मिट्टी खदान का वैध पट्टा या खनिज विभाग से अनुमति प्राप्त किए बिना ही विभिन्न स्थानों से मिट्टी निकाली जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार के प्रतिनिधि लोगों को झांसा देकर उनकी जमीन से मिट्टी कटवा रहे हैं। कई मामलों में जमीन मालिकों को न तो उचित जानकारी दी गई और न ही किसी प्रकार का लिखित समझौता किया गया।
इस पूरे मामले पर लोहारी ग्राम पंचायत के सरपंच ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पंचायत को मिट्टी कटाव अथवा उत्खनन के संबंध में किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी गई है। न तो पंचायत से अनुमति ली गई और न ही किसी बैठक में इस विषय पर चर्चा की गई। सरपंच ने स्पष्ट कहा कि यदि कहीं से मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है तो उसके लिए संबंधित विभागों की अनुमति आवश्यक है, लेकिन अब तक ऐसा कोई दस्तावेज पंचायत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के नाम पर नियम-कायदों को दरकिनार कर खनिज अधिनियम का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। यदि मिट्टी उत्खनन की अनुमति नहीं ली गई है तो यह न केवल अवैध खनन की श्रेणी में आता है बल्कि इससे शासन को मिलने वाले राजस्व की भी भारी हानि हो रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि मिट्टी कहां से लाई जा रही है और क्या उसके लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है या नहीं। साथ ही दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बना यह मामला अब प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जिम्मेदार विभाग समय रहते कार्रवाई नहीं करते हैं तो अवैध उत्खनन और भ्रष्टाचार को और बढ़ावा मिलेगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र जांच एवं कार्रवाई नहीं हुई तो वे जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और शासन के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों पर क्या कार्रवाई होती है।यह संस्करण समाचार पत्र में प्रकाशित होने योग्य शैली में तैयार किया गया है और इसमें आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।




