कोरिया वनमंडल में कोल माफिया और लकड़ी माफियाओं के सामने अधिकारी हुए नतमस्तक : दबाव बढ़ने पर अधिकारियों द्वारा कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति
कोरिया वनमंडल में कोल माफिया और लकड़ी माफियाओं के सामने अधिकारी हुए नतमस्तक : दबाव बढ़ने पर अधिकारियों द्वारा कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति

कोरिया। जिले के कोरिया वनमंडल में इन दिनों हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की बाढ़ सी आ गई है, जिससे न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध लकड़ी कटाई की जा रही है। जंगलों के भीतर संगठित तरीके से पेड़ों की कटाई कर ट्रकों और ट्रैक्टरों के माध्यम से लकड़ी बाहर भेजी जा रही है। यह काम खुलेआम हो रहा है के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

इसी के साथ कोयला चोरी का खेल भी तेजी से फल-फूल रहा है। बंद पड़ी खदानों और वन क्षेत्रों में अवैध रूप से कोयला निकालकर उसका परिवहन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार में कई प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत होने की आशंका है, जिसके चलते कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता तक सीमित रह जाती है।
स्थिति को और गंभीर बनाती है जंगलों में लग रही भीषण आग। गर्मी के मौसम में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे बड़ी मात्रा में वन संपदा नष्ट हो रही है और वन्यजीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है।
वन विभाग के रेंज स्तर के अधिकारी इन समस्याओं से निपटने में नाकाम दिखाई दे रहे हैं। जमीनी स्तर पर निगरानी और गश्त की कमी के चलते अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। विभागीय लापरवाही और उदासीनता के कारण स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र की वन संपदा को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
प्रमुख बिंदु:
वन क्षेत्र में अवैध लकड़ी कटाई जोरों पर
बंद खदानों से कोयला चोरी का संगठित नेटवर्क सक्रिय
कई जगह तो कोयला चोरों की खुद की खदाने संचालित भी हो रही हैं।
भीषण आग से जंगल और वन्यजीव प्रभावित
वन विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
मांग:
जनता और संगठनों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई, नियमित गश्त बढ़ाने और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है, ताकि वन संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
समझनें की बात तो यह है कि वन विभाग में बिट गार्ड होते हैं जिनका काम जंगलों में निगरानी करना होता है डिप्टी रेंजर होता है रेंजर होता है इसके बावजूद भी पेड़ कट रहे है ट्रकों के माध्यम से जंगल से उठ कर दूसरी जगह बिना भय बिना डर के ले जाए जा रहे हेतु इनकी कार्यशैली पर सवाल तो खड़े कर ही रहे है।
आखिर चोरों को इतनी हिम्मत कहां से जाती है अगर अधिकारियों के संलिप्तता नहीं है तो?
निष्कर्ष:
कोरिया वनमंडल की वर्तमान स्थिति प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस पर कितनी गंभीरता से कदम उठाते हैं और जंगलों को बचाने के लिए क्या ठोस रणनीति अपनाते हैं या सिर्फ अपना कमीशन ले कर कोल लकड़ी माफियाओं को ऐसे ही छूट दे कर रखेंगे।





