परीक्षा नियमों की अनदेखी: एम सी बी जिले में जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर ‘अपनों को रेवड़ी’ बांटने के लग रहे आरोप।
परीक्षा नियमों की अनदेखी: एम सी बी जिले में जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पर 'अपनों को रेवड़ी' बांटने के लग रहे आरोप।

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) | 7 मार्च 2026 छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल द्वारा आयोजित होने वाली हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षाओं के संचालन को लेकर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले का जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। आरोप है कि विभाग ने राज्य कार्यालय के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार कर परीक्षा केंद्रों में उसी संस्था के प्राचार्यों को केंद्राध्यक्ष नियुक्त कर दिया है, जिससे 16 मार्च से शुरू होने वाली परीक्षाओं की निष्पक्षता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।साथ ही साथ
क्या है राज्य ओपन स्कूल का स्पष्ट आदेश?
छत्तीसगढ़ राज्य ओपन स्कूल, रायपुर द्वारा जारी आदेश क्रमांक 1426/परीक्षा/गोपनीय/2026, दिनांक 18 फरवरी 2026 में साफ निर्देश दिए गए थे कि परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिस स्कूल में परीक्षा केंद्र है, वहां के प्राचार्य या व्याख्याता को केंद्राध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा।स्थानीय प्रभाव या मिलीभगत की संभावना को खत्म करने के लिए किसी अन्य संस्था के प्राचार्य या व्याख्याता की नियुक्ति अनिवार्य है।


नियमों की उड़ी धज्जियां: चहेतों को नवाजा गया।
इसके बावजूद, जिला शिक्षा अधिकारी MCB द्वारा जारी आदेश क्रमांक 5167, दिनांक 6 मार्च 2026 में इन नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज करने के आरोप लगे हैं। सूत्रों और प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लालपुर में उसी संस्था की प्राचार्य श्रीमती सुदिप्ता शर्मा को ही केंद्राध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है।इसी तरह गोदरीपारा केंद्र में भी भरत जायसवाल की नियुक्ति को लेकर समान स्थिति बताई जा रही है, जहाँ स्थानीय संस्था के व्यक्ति को ही कमान सौंप दी गई है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार परीक्षा में बैठने वाले बच्चों से नकल करा कर पास कराने के एवज में5000 से 10000 रुपए तक वसूली की जा रही हैं। सूत्र
“यदि परीक्षा केंद्र का संचालन उसी संस्था का प्रमुख करेगा, तो वहां निष्पक्षता प्रभावित होना तय है। राज्य ओपन स्कूल ने इसी कारण बाहरी नियुक्तियों के निर्देश दिए थे, जिसे जिला स्तर पर ठेंगा दिखाया गया है।” — शिक्षा विभाग के जानकार
प्रशासनिक चूक या जानबूझकर लिया गया फैसला?
एक तरफ राज्य कार्यालय के सख्त निर्देश मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर DEO कार्यालय का आदेश उन निर्देशों के ठीक विपरीत दिखाई दे रहा है। शिक्षा जगत में चर्चा है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर ‘अपनों’ को लाभ पहुंचाने और परीक्षा प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप का मार्ग प्रशस्त करने की कोशिश है।
जांच की उठी मांग।
परीक्षा शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों और शिक्षाविदों ने उच्च अधिकारियों से इस पूरे प्रकरण की तत्काल जांच की मांग की है। मांग की जा रही है कि नियमों के विरुद्ध हुई नियुक्तियों को निरस्त कर बाहरी केंद्राध्यक्षों की तैनाती की जाए, ताकि बोर्ड परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रह सके।




