स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल: टूटे हाथ पर गत्ता बांधकर रातभर भटका मासूम, 2 दिन बाद एक्सरे की बात कहकर अस्पताल ने पल्ला झाड़ा* एमसीबी: खड़गवां से चिरमिरी जिला अस्पताल तक इलाज के लिए भटकते रहे परिजन; मजबूरी में प्राइवेट सेंटर से कराया एक्सरे
स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल: टूटे हाथ पर गत्ता बांधकर रातभर भटका मासूम, 2 दिन बाद एक्सरे की बात कहकर अस्पताल ने पल्ला झाड़ा* एमसीबी: खड़गवां से चिरमिरी जिला अस्पताल तक इलाज के लिए भटकते रहे परिजन; मजबूरी में प्राइवेट सेंटर से कराया एक्सरे

चिरमिरी/खड़गवां :- सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों की हकीकत उस वक्त सामने आ गई, जब हाथ में गंभीर फ्रैक्चर से तड़प रहे एक मासूम बच्चे को समय पर इलाज नसीब नहीं हुआ। अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता का आलम यह रहा कि पीड़ित बच्चे को तुरंत उपचार देने के बजाय दो दिन बाद एक्सरे कराने की सलाह देकर टरका दिया गया। लाचार परिजनों को निजी सेंटर से एक्सरे करवाकर बच्चे के इलाज के लिए चक्कर काटने पड़े।
खड़गवां से शुरू हुई लापरवाही, चिरमिरी जिला हॉस्पिटल में भी नहीं मिला उपचार
जानकारी के अनुसार, कक्षा चौथी में पढ़ने वा
ले मासूम राजन का हाथ गिरने की वजह से बुरी तरह टूट गया था। परिजन उसे तुरंत नजदीकी खड़गवां अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां समुचित प्लास्टर या प्राथमिक उपचार की जगह हाथ को गत्ते और लकड़ी के सहारे बांध दिया गया। हालत गंभीर देख परिजन रात करीब 8 बजे बच्चे को लेकर चिरमिरी जिला अस्पताल पहुंचे, ताकि बच्चे का पक्का इलाज हो सके।
“दो दिन बाद होगा एक्सरे, सिरप पिलाकर रखो”

जिला अस्पताल पहुंचने के बाद भी परिजनों की परेशानी कम नहीं हुई। बच्चे के पिता ने बताया कि अस्पताल के ड्यूटी स्टाफ ने उन्हें साफ कह दिया कि फिलहाल एक्सरे नहीं हो पाएगा और दो दिन बाद एक्सरे की सुविधा मिलेगी। अस्पताल प्रबंधन ने सिर्फ एक सिरप व मरहम थमाकर बच्चे को दर्द में ही छोड़ दिया।
दर्द से कराहते बच्चे को देख निजी सेंटर भागे परिजन

बच्चे के पिता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “मासूम बच्चा टूटे हाथ के असहनीय दर्द से तड़प रहा था, वह दो दिन तक कैसे इंतजार करता? अस्पताल की ऐसी लापरवाही देखकर हमें मजबूरन बाहर किसी प्राइवेट जांच केंद्र से अपनी जेब ढीली कर एक्सरे कराना पड़ा।” निजी सेंटर से रिपोर्ट मिलने के बाद परिजन फिर से अस्पताल के चक्कर लगाने को मजबूर हुए।
उठ रहे गंभीर सवाल:
आपातकालीन स्थिति (इमरजेंसी) के बावजूद जिला अस्पताल में 24 घंटे एक्सरे की सुविधा क्यों नहीं मिल रही?
गंभीर रूप से घायल बच्चों के प्रति स्वास्थ्य कर्मियों का यह रवैया किसकी शह पर जारी है?
सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किए जा रहे करोड़ों के बजट के बाद भी गरीबों को निजी सेंटरों की ओर क्यों धकेला जा रहा है?




