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देवगढ़ वन परिक्षेत्र में रेत का खेल! हसदेव नदी से बेखौफ उठ रही रेत, रेंजर उमेश पैकरा की निगरानी पर सवाल तर्रा-बसेर से जुड़े जंगल क्षेत्र में लगातार उत्खनन का आरोप, रेलवे और बड़े निर्माण कार्यों तक पहुंच रही रेत—वन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

देवगढ़ वन परिक्षेत्र में रेत का खेल! हसदेव नदी से बेखौफ उठ रही रेत, रेंजर उमेश पैकरा की निगरानी पर सवाल तर्रा-बसेर से जुड़े जंगल क्षेत्र में लगातार उत्खनन का आरोप, रेलवे और बड़े निर्माण कार्यों तक पहुंच रही रेत—वन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल

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कोरिया/देवगढ़। देवगढ़ वन परिक्षेत्र में तर्रा-बसेर से जुड़े जंगल क्षेत्र से निकलने वाली हसदेव नदी में लगातार रेत उत्खनन किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकालकर रेलवे सहित बड़े-बड़े निर्माण कार्यों में सप्लाई की जा रही है।

 

इस पूरे मामले में देवगढ़ वन परिक्षेत्र के रेंजर उमेश पैकरा की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि क्षेत्र में रेत उत्खनन और परिवहन की गतिविधियां लगातार चलने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी का फील्ड में प्रभावी निरीक्षण नजर नहीं आ रहा है।

 

जंगल से निकल रही रेत, विभाग बना मूकदर्शक?

 

हसदेव नदी से जुड़े वन क्षेत्र में यदि लगातार रेत निकाली जा रही है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि वन विभाग की नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था आखिर कहां है? स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े पैमाने पर रेत की आवाजाही बिना किसी प्रभावी निगरानी के लंबे समय तक चलना विभागीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

रेलवे और बड़े निर्माणों तक सप्लाई की चर्चा

 

स्थानीय आरोपों के मुताबिक नदी से निकाली जा रही रेत को रेलवे कार्यों समेत बड़े भवन निर्माणों तक पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन को यह जांचना होगा कि रेत किस अनुमति के तहत निकाली जा रही है, उसका परिवहन किन दस्तावेजों के आधार पर हो रहा है और निर्माण कार्यों में इसका इस्तेमाल कहां-कहां किया जा रहा है।

 

अब निगाहें वन विभाग के अधिकारियों पर हैं कि देवगढ़ वन परिक्षेत्र में हसदेव नदी से हो रहे रेत उत्खनन की जांच कब होगी? रेंजर उमेश पैकरा के कार्यक्षेत्र में चल रही इस गतिविधि को लेकर स्थल निरीक्षण, उत्खनन की मात्रा, परिवहन और संबंधित दस्तावेजों की जांच से ही तस्वीर साफ हो सकेगी।

 

हसदेव नदी से उठती रेत के साथ अब वन विभाग की जवाबदेही का सवाल भी उठ रहा है।

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