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सरकारी तेल पर ‘प्राइवेट सफर’! स्वास्थ्य विभाग में ईंधन घोटाले की बू, सरकारी पर्ची से पड़ोसी राज्य की निजी कार की टंकी फुल? CMHO कार्यालय की मुहर और अधिकारियों के हस्ताक्षर वाली पर्ची से निजी वाहन में पेट्रोल भरने का दावा, अस्पतालों में संसाधनों का संकट और सरकारी खजाने पर सवाल

सरकारी तेल पर ‘प्राइवेट सफर’! स्वास्थ्य विभाग में ईंधन घोटाले की बू, सरकारी पर्ची से पड़ोसी राज्य की निजी कार की टंकी फुल? CMHO कार्यालय की मुहर और अधिकारियों के हस्ताक्षर वाली पर्ची से निजी वाहन में पेट्रोल भरने का दावा, अस्पतालों में संसाधनों का संकट और सरकारी खजाने पर सवाल

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मनेंद्रगढ़/एमसीबी।मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के स्वास्थ्य विभाग में सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। सामने आए दस्तावेजों और सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी कार्यों के लिए आवंटित पेट्रोल-डीजल का उपयोग निजी वाहनों में कराया जा रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला हो सकता है।

 

सूत्रों के अनुसार, मनेंद्रगढ़ के एक पेट्रोल पंप से CMHO कार्यालय की आधिकारिक मुहर और जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर वाली पर्ची पर एक पड़ोसी राज्य में पंजीकृत निजी कार में 20 लीटर पेट्रोल भरवाया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वाहन सरकारी नहीं था, तो उसके लिए सरकारी ईंधन कूपन किस आधार पर जारी किया गया?

 

सरकारी मुहर… निजी गाड़ी!

 

दस्तावेजों में स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक सील और स्वीकृति के हस्ताक्षर मौजूद बताए जा रहे हैं। इससे यह आशंका गहराती है कि मामला किसी एक कर्मचारी की गलती नहीं, बल्कि विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितता का हो सकता है।

 

क्या यह सिर्फ एक पर्ची या बड़े खेल की झलक?

 

जानकारों का मानना है कि यदि पूरे रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की जाए, तो सरकारी ईंधन के नाम पर फर्जी बिलिंग और कूपनों के जरिए लाखों रुपये के संभावित फ्यूल घोटाले का खुलासा हो सकता है। सवाल यह भी है कि अब तक ऐसे कितने कूपन जारी हुए और किन-किन वाहनों में सरकारी तेल भरवाया गया?

 

जनता परेशान, सरकारी तेल पर निजी ऐश?

 

एक ओर अस्पतालों में दवाओं की कमी, एम्बुलेंस संचालन की चुनौतियां और मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यदि सरकारी बजट से निजी वाहनों में ईंधन भरवाए जाने के आरोप सही हैं, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

उठते बड़े सवाल

 

निजी वाहन के लिए सरकारी ईंधन कूपन किस नियम के तहत जारी हुआ?

 

क्या सक्षम अधिकारी की अनुमति थी?

 

क्या यह अकेला मामला है या लंबे समय से चल रहा खेल?

 

सरकारी धन के दुरुपयोग की जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

 

यदि सामने आए दस्तावेज और आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला होगा। आवश्यक है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, सभी संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं और दोषी पाए जाने वालों पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी जांच और रिपोर्टिंग में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि सभी तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष सामने आ सके।

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